पद्म पुरुष्कार फोटो एवं उसका निर्माण

padma awardsपद्म पुरुष्कार फोटो एवं उसका निर्माण:  1954 में पद्म पुरस्‍कारों की शुरूआत की गई तथा प्रति वर्ष गणतंत्र दिवस के अवसर पर इन सम्‍मानों की घोषणा की जाती है। इस सम्‍मान को तीन श्रेणियों वर्गीकृत किया गया है, जिनके नाम हैं पद्मविभूषण, पद्मभूषण और पद्मश्री। विशिष्‍ट सेवा के लिए ‘पद्मश्री’, उच्‍च स्‍तर पर विशिष्‍ट सेवा के लिए ‘पद्मभूषण’ तथा अति विशिष्‍ट एवं प्रसिद्ध सेवा के लिए ‘पद्मविभूषण’ से सम्‍मानित किया जाता है। पद्म सम्‍मान में राष्‍ट्रपति का ठप्‍पा लगा एक सनद एवं पदक दिया जाता है। अधिष्‍ठापन समारोह के दिन प्रत्‍येक पुरस्‍कृत व्‍यक्ति के बारे में संक्षिप्‍त विवरण से अलंकृत एक पत्रिका भी जारी की जाती है।

पद्मविभूषण : इस पदक का डिजाइन गोलाकार है जिस पर ज्‍यामिती आकृतियां हैं। गोल हिस्‍से की गोलाई 4.4 सेंटीमीटर तथा मोटाई करीब 0.6 मिलीमीटर है। इसके ऊपर गोलाकार में कमल के फूल की नक्‍काशी की गई है। कांस्‍य से कमल के ऊपर हिंदी में पद्म तथा कमल के नीचे विभूषण उकेरा गया है। पदक के दोनों तरफ सफेद सोने से अलंकरण किया गया है।
पद्मभूषण : यह पदक पद्म विभूषण की तरह ही है लेकिन इसके दोनों तरफ स्‍टैंडर्ड सोना है।
पद्मश्री : दूसरे पद्म पदकों की तरह ही यह पदक है लेकिन इसकी दोनों तरफ स्‍टैनलेस स्‍टील से अलंकरण किया गया है

भारत सरकार की टकसाल, कोलकाता: भारत सरकार की कोलकाता स्थित टकसाल 1757 में पुराने किले के एक भवन में स्‍थापित की गई थी जहां आजकल डाक घर (जीपीओ) है। इसे कलकत्‍ता टकसाल कहा जाता था जिसमें मुर्शीदाबाद नाम से सिक्‍के ढाले जाते थे। दूसरी कलकत्‍ता टकसाल गिलेट जहाज भवन संस्‍थान में स्‍थापित की गई और इस टकसाल में भी मुर्शीदाबाद के नाम से सिक्‍कों का उत्‍पादन जारी रहा। तीसरी कलकत्‍ता टकसाल स्‍ट्रेंड रोड पर 01 अगस्‍त, 1829 (चांदी टकसाल) से शुरू की गई। 1835 तक इस टकसाल से निकलने वाले सिक्‍कों पर मुर्शीदाबाद टकसाल का नाम ढाला जाता रहा। 1860 में चांदी टकसाल के उत्‍तर में केवल तांबे के सिक्‍के ढालने के लिए एक ‘तांबा टकसाल’ का निर्माण किया गया। चांदी और तांबा टकसालों में तांबे, चांदी और सोने के सिक्‍कों का उत्‍पादन किया जाता था। ब्रिटिश राज के दौरान सिक्‍के ढालने के अलावा कोलकाता टकसाल में पदकों एवं अलंकरणों का निर्माण भी किया जाता था। आज भी यहां पदकों का निर्माण किया जाता है।

1952 में इस टकसाल के बंद होने पर 19 मार्च, 1952 को तत्‍का‍लीन वित्‍त मंत्री श्री सी.डी. देशमुख द्वारा वर्तमान अलीपुर टकसाल की शुरूआत की गई। तब से अलीपुर टकसाल में ढलाई और पदकों, अलंकरणों एवं बिल्‍ले तैयार किये जाते हैं। आज की तारीख में इस टकसाल से नागरिक, सैन्‍य, खेलकूद, पुलिस आदि कई पदकों के निर्माण के साथ-साथ 1,2,5,10 रूपये के सिक्‍कों का उत्‍पादन भी किया जाता है। इन पदकों में प्रमुख हैं- भारत रत्‍न, पद्मविभूषण, पद्मभूषण, पद्मश्री जैसे सर्वोच्‍च नागरिक सम्‍मान एवं परमवीर चक्र आदि जैसे सैन्‍य सम्‍मान हैं।

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