रहीम के दोहे भाग 1

रहीम के दोहे खंड संख्या १: रहीम मध्यकालीन सामंतवादी संस्कृति के कवि थे। इनके बारे में विस्तृत से पढ़ें रहीम के दोहे  रहीम का व्यक्तित्व बहुमुखी प्रतिभा-संपन्न था।  रहीमदास जी के दोहे जीवन आज भी सार्थक हैं एवं हमारे दैनिक जीवन में लाभकारी हैं । इसी कड़ी रहीमदास जी के प्रमुख दोहे एवं उनका अर्थ निम्नलिखित हैं । इसी प्रकार रहीम के प्रमुख दोहे उनके शब्दार्थ सहित निम्न तीन खंडो में प्रकाशित है । इस कड़ी में भाग 1 के दोहे निम्नलिखित हैं ।

रहीम के दोहे खंड संख्या 1 : 

1. रहिमन धागा प्रेम का, मत तोरो चटकाय.
टूटे पे फिर ना जुरे, जुरे गाँठ परी जाय.
दोहे का अर्थ: रहीम कहते हैं कि प्रेम का नाता नाज़ुक होता है. इसे झटका देकर तोड़ना उचित नहीं होता. यदि यह प्रेम का धागा एक बार टूट जाता है तो फिर इसे मिलाना कठिन होता है और यदि मिल भी जाए तो टूटे हुए धागों के बीच में गाँठ पड़ जाती है.

2. रहिमन देख बड़ेन को, लघु न दीजिये डारि।
जहाँ काम आवै सुई, कहा करै तलवारि॥
दोहे का अर्थ: बड़ों को देखकर छोटों को भगा नहीं देना चाहिए। क्योंकि जहां छोटे का काम होता है वहां बड़ा कुछ नहीं कर सकता। जैसे कि सुई के काम को तलवार नहीं कर सकती।

3. माली आवत देख के, कलियन करे पुकारि।
फूले फूले चुनि लिये, कालि हमारी बारि॥
दोहे का अर्थ: माली को आते देखकर कलियां कहती हैं कि आज तो उसने फूल चुन लिया पर कल को हमारी भी बारी भी आएगी क्योंकि कल हम भी खिलकर फूल हो जाएंगे।

4. बिगरी बात बने नहीं, लाख करो किन कोय.
रहिमन फाटे दूध को, मथे न माखन होय.
दोहे का अर्थ: मनुष्य को सोचसमझ कर व्यवहार करना चाहिए,क्योंकि किसी कारणवश यदि बात बिगड़ जाती है तो फिर उसे बनाना कठिन होता है, जैसे यदि एकबार दूध फट गया तो लाख कोशिश करने पर भी उसे मथ कर मक्खन नहीं निकाला जा सकेगा.

5. तरुवर फल नहिं खात है, सरवर पियहि न पान।
कहि रहीम पर काज हित, संपति सँचहि सुजान॥
दोहे का अर्थ:वृक्ष अपने फल स्वयं नहीं खाते हैं और सरोवर भी अपना पानी स्वयं नहीं पीती है। इसी तरह अच्छे और सज्जन व्यक्ति वो हैं जो दूसरों के कार्य के लिए संपत्ति को संचित करते हैं।

6. दुख में सुमिरन सब करे, सुख में करे न कोय।
जो सुख में सुमिरन करे, तो दुख काहे होय॥
दोहे का अर्थ: दुख में सभी लोग याद करते हैं, सुख में कोई नहीं। यदि सुख में भी याद करते तो दुख होता ही नहीं।

7. खैर, खून, खाँसी, खुसी, बैर, प्रीति, मदपान।
रहिमन दाबे न दबै, जानत सकल जहान॥
दोहे का अर्थ: दुनिया जानती है कि खैरियत, खून, खांसी, खुशी, दुश्मनी, प्रेम और मदिरा का नशा छुपाए नहीं छुपता है।

8. रहिमन मनहि लगाईं कै, देखि लेहू किन कोय
नर को बस करिबो कहा, नारायन बस होय
दोहे का अर्थ: कविवर रहीम के मतानुसार मन लगाकर कोई काम कर देखें तो कैसे सफलता मिलती है। अगर अच्छी नीयत से प्रयास किया जाये तो नर क्या नारायण को भी अपने बस में किया जा सकता है।

9. जो रहीम उत्तम प्रकृति, का करी सकत कुसंग.
चन्दन विष व्यापे नहीं, लिपटे रहत भुजंग.
दोहे का अर्थ: रहीम कहते हैं कि जो अच्छे स्वभाव के मनुष्य होते हैं,उनको बुरी संगति भी बिगाड़ नहीं पाती. जहरीले सांप चन्दन के वृक्ष से लिपटे रहने पर भी उस पर कोई जहरीला प्रभाव नहीं डाल पाते.

10. रूठे सुजन मनाइए, जो रूठे सौ बार.
रहिमन फिरि फिरि पोइए, टूटे मुक्ता हार.
दोहे का अर्थ: यदि आपका प्रिय सौ बार भी रूठे, तो भी रूठे हुए प्रिय को मनाना चाहिए,क्योंकि यदि मोतियों की माला टूट जाए तो उन मोतियों को बार बार धागे में पिरो लेना चाहिए.

 

Filed in: कला एवं संस्कृति, कवितायेँ, धर्म एवं संस्कृति, लेखक एवं कवि, सामान्य ज्ञान लेख, हिंदी भाषा, हिंदी भाषा ज्ञान Tags: , , , , , ,

You might like:

हॉकी खिलाडी बलबीर सिंह का निधन हॉकी खिलाडी बलबीर सिंह का निधन
राजीव गांधी किसान न्याय योजना राजीव गांधी किसान न्याय योजना
इराक के नए प्रधानमंत्री बने मुस्तफा अल- काधेमी इराक के नए प्रधानमंत्री बने मुस्तफा अल- काधेमी
Budget 2020-21 highlights in Hindi बजट 2020-21 Budget 2020-21 highlights in Hindi बजट 2020-21
© 2020 सामान्य ज्ञान. All rights reserved. XHTML / CSS Valid.
Proudly designed by eShala.org.