रहीम के दोहे

Rahim Ke Doheरहीम के दोहे: रहीम मध्यकालीन सामंतवादी संस्कृति के कवि थे।  अबदुर्ररहीम खानखाना का जन्म सन् 1553 में बैरम खाँ के घर लाहौर में हुआ था।  रहीम का व्यक्तित्व बहुमुखी प्रतिभा-संपन्न था। वे एक ही साथ सेनापति, प्रशासक, आश्रयदाता, दानवीर, कूटनीतिज्ञ, बहुभाषाविद, कलाप्रेमी, कवि एवं विद्वान थे। अकबर ने रहीम को शाही खानदान के अनुरुप “मिर्जा खाँ’ की उपाधि से सम्मानित किया।रहीम सांप्रदायिक सदभाव तथा सभी संप्रदायों के प्रति समादर भाव के सत्यनिष्ठ साधक थे। वे भारतीय सामासिक संस्कृति के अनन्य आराधक थे। रहीम ने अवधी और ब्रजभाषा दोनों में ही कविता की है जो सरल, स्वाभाविक और प्रवाहपूर्ण है। उनके काव्य में श्रृंगार, शांत तथा हास्य रस मिलते हैं तथा दोहा, सोरठा, बरवै, कवित्त और सवैया उनके प्रिय छंद है | रहीमदास जी के दोहे जीवन आज भी सार्थक हैं एवं हमारे दैनिक जीवन में लाभकारी हैं । इसी कड़ी रहीमदास जी के प्रमुख दोहे एवं उनका अर्थ निम्नलिखित हैं । इसी प्रकार रहीम के प्रमुख दोहे उनके शब्दार्थ सहित निम्न तीन खंडो में प्रकाशित है ।

रहिमन धागा प्रेम का, मत तोरो चटकाय.
टूटे पे फिर ना जुरे, जुरे गाँठ परी जाय.

दोहे का अर्थ: रहीम कहते हैं कि प्रेम का नाता नाज़ुक होता है. इसे झटका देकर तोड़ना उचित नहीं होता. यदि यह प्रेम का धागा एक बार टूट जाता है तो फिर इसे मिलाना कठिन होता है और यदि मिल भी जाए तो टूटे हुए धागों के बीच में गाँठ पड़ जाती है.

1. रहीम के दोहे खंड संख्या १

2. रहीम के दोहे खंड संख्या २ 

3. रहीम के दोहे खंड संख्या ३

Filed in: कला एवं संस्कृति, कवितायेँ, धर्म एवं संस्कृति, प्रसिद्ध व्यक्ति, भारत, मुस्लिम धर्म, लेखक एवं कवि, सामान्य ज्ञान, सामान्य ज्ञान लेख, हिंदी भाषा, हिंदी भाषा ज्ञान Tags: , , , , ,

You might like:

15वें वित्त आयोग का कार्यकाल 30 नवम्बर, 2019 तक बढ़ा 15वें वित्त आयोग का कार्यकाल 30 नवम्बर, 2019 तक बढ़ा
सामान्य ज्ञान Quiz No. 235 सामान्य ज्ञान Quiz No. 235
अमेरिका ने भारत से कारोबारी वरीयता का GSP दर्जा छीना अमेरिका ने भारत से कारोबारी वरीयता का GSP दर्जा छीना
अमित शाह ने गृह मंत्री का पदभार संभाला अमित शाह ने गृह मंत्री का पदभार संभाला
© 2019 सामान्य ज्ञान. All rights reserved. XHTML / CSS Valid.
Proudly designed by eShala.org.