‘स्‍मार्ट शहर मिशन’ परियोजना | Smart City Scheme

Smart City Scheme India 100‘स्‍मार्ट शहर मिशन’ परियोजना (Smart City Scheme): प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 25 जून 2015 को शहरी भारत की तस्वीर बदलने के लिए  ‘स्‍मार्ट शहर मिशन’ परियोजना (Smart City Scheme) एवं अन्य दो परियोजनाओं की शुरुआत की। ये तीनों ही योजनाएं देश के शहरों से जुड़ी हुई हैं। इनमें 100 स्मार्ट सिटी बनाने, 500 शहरों के लिए अटल शहरी पुनर्जीवन और परिवर्तन मिशन और 2022 तक शहरी इलाकों में सभी के लिए घर बनाने की योजना शामिल हैं। नरेंद्र मोदी ने कहा स्मार्ट सिटी बनाने का निर्णय लोगों और स्थानीय प्रशासन का हो न कि सरकार का। प्रधानमंत्री ने बताया कि भारत में पहली बार यह चुनौती सामने आई है जिसमें शहरी भारत के नागरिक अपने सपनों के शहर को विकसित करने में योगदान दे सकते हैं। आवश्यक मानकों को पूरा करने की स्पर्धा में सफल शहरों को स्मार्ट शहर बनाया जाएगा। प्रधानमंत्री ने कहा कि स्पर्धी व्यवस्था से ऊपर-नीचे की सोच खत्म होगी और जन केंद्रित शहरी विकास हो सकेगा।
सौ स्‍मार्ट शहर विकसित करने की चुनौतियों को ध्‍यान में रखते हुए स्‍मार्ट शहर मिशन के अंतर्गत दो चरणों की प्रतिस्‍पर्धा के जरिये केवल सक्षम शहरों को चुना जाएगा। यह संकेत प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी द्वारा स्‍मार्ट शहर मिशन के लिए आज जारी संचालन दिशा निर्देशों में दिया गया है। प्रतिस्‍पर्धा के दोनों चरणों में चयन के मानदंड इस्‍तेमाल किए जाएंगे। शहर चुनौती प्रतिस्‍पर्धा के चरण-1 में, प्रत्‍येक राज्‍य और संघ शासित प्रदेश कुछ मानदंडों के आधार पर अपने सभी शहरों का स्‍कोर लेंगे और प्रतिस्‍पर्धा के चरण-2 में भाग लेने के लिए संभावित स्‍मार्ट शहरों की दी गई संख्‍या के अनुसार सबसे ज्‍यादा स्‍कोर करने वाले को मनोनीत करेंगे। राज्‍य/संघ शासित प्रदेश के अंतर्गत चरण-1 के लिए मूल्‍यांकन मानदंड नीचे दिए गए हैं:
1.  वर्तमान सेवा स्‍तर (25 अंक) : इसमें 2011 की जनगणना के सेवा स्‍तरों में वृद्धि, एक संचालनात्‍मक ऑनलाइन शिकायत निवारण प्रणाली, कम से कम पहले मासिक ई-सूचनापत्र का प्रकाशन और पिछले दो वित्‍तीय वर्षों के लिए वेबसाइट पर नगर निगम के बजट खर्च के ब्‍योरे का प्रकाशन शामिल है।
2.  संस्‍थागत प्रणाली और क्षमता (15 अंक) : इसमें सेवाएं देने में देरी के लिए जुर्माना लागू करना और पिछले तीन वर्षों में आंतरिक संसाधन जुटाने के लिए किए गए सुधार शामिल हैं।
3.  स्‍व–वित्‍त (30 अंक): शहरी स्‍थानीय निकायों द्वारा आखिरी महीने तक वेतन का भुगतान, वित्‍त वर्ष 2012-13 तक खातों का लेखा परीक्षण, 2014-15 के बजट में आंतरिक आय का योगदान और 2014-15 के दौरान प्रतिष्‍ठान का प्रतिशत और उपयोगकर्ता शुल्‍क के जरिए पूरा होने वाली जल आपूर्ति के रखरखाव लागत में यह प्रतिबिंबित होगा।
4.  पिछला कार्य-निष्‍पादन रिकॉर्ड (30 अंक): जेएनएनयूआरएम की जिन परियोजनाओं को 2012 तक मंजूर किया गया उनके पूरा होने का प्रतिशत, जेएनएनयूआरएम के अंतर्गत हासिल शहरी स्‍तर के सुधारों का प्रतिशत और आंतरिक संसाधनों से पूरे किए गए पूंजीगत खर्च की सीमा।

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