बजट 2018-19 के प्रमुख बिंदु, तथ्य, विशेषताएं

Union Budget 2018-19बजट 2018-19 के प्रमुख बिंदु, महत्वपूर्ण तथ्य, विशेषताएं: बजट 2018-19 के प्रमुख बिंदु, महत्वपूर्ण तथ्य, विशेषताएं: वित्त मंत्री श्री अरुण जेटली ने वित्त वर्ष 2018-19 के लिए संघीय बजट 1 फरवरी, 2018 को संसद में पेश किया।  पीएम नरेंद्र मोदी ने बजट 2018-19 के संसद में पेश होने के बाद देश की जनता को संबोधित करते हुए कहा कि यह बजट देश के न्यू इंडिया को मजबूत करने वाला बजट है. पीएम मोदी ने कहा कि यह बजट देश के सवा सौ करोड़ लोगों की आशाओं और अपेक्षाओं को मजबूत करने वाला बजट है. यह बजट फार्मर फ्रेंडली और बिजनेस फ्रेंडली ही नहीं डेवलपमेंट फ्रेंडली भी है। बजट 2018-19  की प्रमुख विशेषताएं निम्नलिखित हैं

  • बजट 2018-19 में राजकोषीय स्थिति:
    • वित्त मंत्री श्री अरुण जेटली ने 1 फ़रवरी 2018 को वित्त वर्ष 2018-19 के लिए संघीय बजट को संसद में पेश किया। 2018-19 के दौरान कुल व्यय 24.42 लाख करोड़ रुपये से अधिक होने का अनुमान है। 3.3 प्रतिशत राजकोषीय घाटा 6 लाख 24 हजार 276 करोड़ रुपये होने का अनुमान है जिसका वित्त पोषण ऋण लेकर किया जाएगा। उन्होंने कहा कि लक्ष्य संशोधित अनुमान 2017-18 से सकल घरेलु उत्पाद के राजकोषीय घाटे को 0.2 प्रतिशत कम करने का है। उन्होंने वर्ष 2018 के लिए सकल घरेलु उत्पाद के 3 प्रतिशत के राजस्व घाटे का प्रस्ताव किया है।
    • वित्त मंत्री श्री अरूण जेटली ने कहा कि मौजूदा सरकार ने मई 2014 में उस समय कार्यभार सम्भाला था जब राजकोषीय घाटा बहुत उच्च स्तर पर था। 2013-14 का राजकोषीय घाटा जीडीपी का 4.4 प्रतिशत था। प्रधानमंत्री और सरकार विवेकशील राजकोषीय प्रबंधन और राजकोषीय घाटे को नियंत्रित करने को हमेशा उच्च प्राथमिकता देते हैं। उन्होंने कहा कि मौजूदा सरकार 2014 में लगातार राजकोषीय घाटा समेकन के पथ पर आगे बढ़ी है।
    • राजकोषीय घाटा 2014-15 के 4.1 प्रतिशत से कम करके 2015-16 में 3.9 प्रतिशत तथा 2016-17 में 3.5 प्रतिशत पर लाया गया। 2017-18 में संशोधित राजकोषीय घाटा सकल घरेलु उत्पाद के 3.5 प्रतिशत पर 5.95 लाख करोड़ रुपये होने का अनुमान है।
    • बजट में परिव्यय का संशोधित अनुमान 2017-18 के लिए 21.57 लाख करोड़ रुपए है, जबकि बजट का आकलन 21.47 लाख करोड़ रुपए का था।
    • प्रत्यक्ष करों की वृद्धि दर 2016-17 में 12.6 प्रतिशत और 2017-18 में 18.7 प्रतिशत रही है।कर दाताओं की संख्या जो 2014-15 में 6.47 करोड़ थी, बढ़कर 2016-17 में 8.27 करोड़ हो गई है।
    • वित्त मंत्री ने कहा कि संशोधित राजकोषीय मार्ग दर्शन के लिए सरकार की प्रतिबद्धता के प्रति असंदिग्ध विश्वसनीयता लाने के लिए ऋण नियम को अंगीकार करने और जीडीपी अनुपात की तुलना में केंद्रीय सरकार के ऋण को 40 प्रतिशत नीचे लाने से संबंधित राजकोषीय सुधार और बजट प्रबंधन समिति की प्रमुख सिफारिशों को स्वीकार करने का प्रस्ताव करता हूं। सरकार ने राजकोषीय घाटा लक्ष्य को प्रमुख प्रचालनात्मक मानदण्ड के रूप में उपयोग करने की सिफारिश मान ली है। श्री जेटली ने बताया की आवश्यक संशोधन प्रस्ताव वित्त विधेयक में शामिल कर लिए गए हैं।
  • कृषि और ग्रामीण अर्थव्‍यवस्‍था:
    • वर्ष 2022 तक किसानों की आय को दोगुना करने की अपनी वचनबद्धता को दोहराते हुए सरकार द्वारा अनेक नई योजनाओं और उपायों की घोषणा की गई है।
    • आगामी खरीफ से सभी अघोषित फसलों के न्‍यूनतम समर्थन मूल्‍य को उत्‍पादन लागत के कम से कम डेढ़ गुणा करने का फैसला किया गया है।
    • इससे पहले रबी की अधिकांश घोषित फसलों का न्‍यूनतम समर्थन मूल्‍य लागत से डेढ़ गुणा तय किया जा चुका है।सरकार द्वारा कृषि क्षेत्र के लिये संस्‍थागत ऋण की राशि में वर्ष दर वर्ष निरंतर वृद्धि की गई है और यह राशि वर्ष 2014-15 के 8.5 लाख करोड़ रुपए से बढ़ाकर वर्ष 2017-18 में 10 लाख करोड़ रुपए कर दी गई है। बजट में वर्ष 2018-19 में इस राशि को 11 लाख करोड़ रुपए करने का प्रस्‍ताव दिया गया है।
    • डेयरी उद्योग की आधारभूत सुविधाओं में वित्‍त निवेश में सहायता के लिये सूक्ष्‍म सिंचाई कोष स्‍थापित करने की घोषणा की गई है।
    • मत्‍स्‍य क्रांति अवसंरचना विकास कोष तथा पशुपालन के लिये आधारभूत सुविधा विकास कोष स्‍थापित करने की घो‍षणा की गई है। इन दोनों कोषों की कुल स्‍थाई निधि 10 हज़ार करोड़़ रुपए होगी।
    • ऑपरेशन फ्लड की तर्ज पर ऑपरेशन ग्रीन्‍स प्रारंभ करने का सरकार का प्रस्‍ताव है। इसके प्रयोजनार्थ 500 करोड़ रुपए की राशि आवंटित की गई। 86 प्रतिशत से ज्‍़यादा लघु और सीमांत किसानों को सीधे बाज़ार से जोड़ने के लिये मौजूदा 22 हज़ार ग्रामीण हाटों को ग्रामीण कृषि बाज़ारों के रूप में विकसित तथा उन्‍नत किया जाएगा।
    • पिछले वर्ष ई-नैम को सुदृढ़ करने और इसे 585 एपीएमसी तक पहुँचाने के संबंध में घोषणा की गई थी। इनमें से 470 को ई-नैम नेटवर्क से जोड़ दिया गया है शेष को 2018 तक जोड़ दिया जाएगा। इस संदर्भ में वित्त मंत्रालय द्वारा संगठित कृषि एवं संबद्ध उद्योग को सहायता के प्रयोजनार्थ 200 करोड़ रुपए की राशि आवंटित करने का प्रस्‍ताव दिया।
    • 1290 करोड़ रुपए के परिव्‍यय के साथ एक पुनर्गठित राष्‍ट्रीय बाँस मिशन को शुरू करने का प्रस्‍ताव पेश किया गया है।
    • महिलाओं के स्‍वयं सहायता समूहों के ऋण को पिछले वर्ष के मुकाबले 37 प्रतिशत बढ़ाकर वर्ष 2016-17 में लगभग 42,500 करोड़ रुपए किया था। 2019 तक यह ऋण राशि बढ़ाकर 75 हज़ार करोड़ रुपए कर दी जाएगी। 2018-19 राष्‍ट्रीय ग्रामीण आजीविका कार्यक्रम के लिये 5750 करोड़ रुपए का प्रस्‍ताव दिया गया।
    • उज्‍ज्वला योजना के अंतर्गत आठ करोड़ गरीब महिलाओं को एलपीजी कनेक्‍शन दिये जाएंगे। सौभाग्‍य योजना के अंतर्गत 16 हज़ार करोड़ रुपए के परिव्‍यय से 4 करोड़ गरीब परिवारों को बिजली के कनेक्‍शन प्रदान किये जा रहे हैं।
  • बजट 2018-19 में ग्रामीण विकास क्षेत्र:
    • ग्रामीण क्षेत्र में बुनियादी ढाँचे और जीविका के साधनों के सृजन के लिए वर्ष 2018-19 में 14.34 लाख करोड़ रूपये खर्च होंगे
    • ग्रामीण विकास विभाग ग्रामीण निर्धनों के जीवन स्तर में सुधार के लिए सतत प्रयासरत रहा है। 2012-13 के 50,162 करोड़ रूपये के बजटीय प्रावधान से 2017-18 में ग्रामीण विकास विभाग का आबंटन 109042.45 करोड़ रूपये पर पहुंच गया। इसके अलावा 2017-18 के दौरान ग्रामीण विकास विभाग के कार्यक्रमों के लिए पीएमजीएसवाई तथा पीएमएवाई में उच्चतर वित्त आयोग अनुदान तथा राज्य के अधिक भागीदारी भी उपलब्ध थी। कुल मिलाकर यह सब 2012-13 में उपलब्ध कुल निधि से लगभग 3 गुणा है।
    • प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना का लक्ष्य मैदानी क्षेत्र में 500 की जनसंख्या तथा पहाड़ी क्षेत्र में रह रही 250 जनसंख्या वाले 1,78,184 निवासियों के लिए सभी मौसमों के दौरान सड़क सम्पर्क मुहैया कराना है।
    • मार्च, 2014 तक 97,838 निवासियों (55 प्रतिशत) को इससे जोड़ा गया। आज प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के अंतर्गत 1,30,947 निवासियों तथा राज्य सरकारों के कार्यक्रमों के माध्यम से अन्य 14,620 निवासियों को इससे जोड़ा गया जिससे कुल 82 प्रतिशत निवासी इससे जुड़ चुके हैं।
    • 2016-17 में 130 किलोमीटर प्रतिदिन की गति से कुल 47,447 किलोमीटर सड़कों का निर्माण किया गया था। 2017-18 में 140 किलोमीटर प्रतिदिन की गति से इसे 51,000 किलोमीटर तक ले जाने के प्रयास किए जा रहे हैं। इससे मार्च, 2019 तक सभी पात्र निवासियों को सभी मौसमीय सड़क सम्पर्क पूर्ण उपलब्धि प्राप्त करने में समर्थ हो जाएंगे।
    • हम कृषि बाजार (मंडी) के लिए अच्छी-चौड़ी सड़कों को ध्यान में रखते हुए मौजूदा चुनिंदा ग्रामीण सड़कों के उन्नयन के लिए उनके आर्थिक महत्व और ग्रामीण बाजार केंद्रों तथा ग्रामीण हबों में वृद्धि की सुविधा प्रदानगी में उनकी भूमिका के आधार पर प्रावधान करके ग्रामीण सड़क तंत्र समेकित करना चाहते हैं। इससे चरण-।।। और सुदृढ़ होगा जिसका पहले ही कार्यान्वयन जारी है। प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना-।।। के रूप में 1,10,000 किलोमीटर का उन्नयन प्रस्तावित है। ऐसा करने के लिए 2022 तक केंद्रीय सरकार से 19,000 करोड़ रूपये के वार्षिक वित्तपोषण की व्यवस्था जारी रखी जाएगी। प्रधानमंत्री के ‘नया भारत-2022’ के स्वप्न को पूरा करने के लिए बाजारों को सड़कों से जोड़ने और उन्हें निकट लाने की जरूरत है ताकि किसान बाजारों का लाभ उठा सकें।
      सड़कों के रखरखाव और सभी सड़कों की जीआईएस मैपिंग के महत्व को समझते हुए निश्चित तौर पर एक दमदार रखरखाव नीति तैयार करने और सभी सड़कों की जीआईएस मैपिंग को पूरा करने के साथ वित्त पोषण की व्यवस्था भी जरूरी है। इससे उच्च मानकों के साथ पीएमजीएसवाई सड़कों का रखरखाव सुनिश्चित होगा। 15 फीसदी पीएमजीएसवाई सड़कों को अब प्लास्टिक, जिओ-टेक्सटाइल,फ्लाई एस, लोहा और तांबे के कचरे के इस्तेमाल जैसी नवोन्मेषी हरित प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल से तैयार किया जा रहा है। इससे न केवल निर्माण लागत में कमी आएगी बल्कि स्थानीय कचरे के इस्तेमाल को बढ़ावा मिलेगा।
    • दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन में विविधता लाने के लिए 4.5 करोड़ से अधिक महिलाओं को एसएचजी के तहत लाया गया। क्षमता विकास एवं कौशल प्रशिक्षण के जरिए आर्थिक गतिविधियों के लिए बैंक लिंकेज में भी पिछले कुछ वर्षों के दौरान उल्लेखनीय विस्तार किया गया है। वर्ष 2014-15 में 23,953 करोड़ रूपये के बैंक लिंकेज से वर्तमान ऋण बकाये का आकार बढ़कर करीब 60 हजार करोड़ रूपये हो गया है। पिछले कुछ वर्षों के दौरान उत्तरी, पूर्वी और पूर्वोत्तर राज्यों में महिला एसएचजी के तहत आजीविका में भी दक्षिणी राज्यों के एसएचसी की तरह विविधता आई है। इससे गरीब परिवारों को अपनी आय और उत्पादकता बढ़ाकर गरीबी से बाहर आने में मदद मिलेगी। एक हजार ऑर्गेनिक क्लस्टर के विकास की ओर रूख करते हुए सतत कृषि के लिए 32 लाख से अधिक महिला किसानों के साथ काम किया जा रहा है।
    • मनरेगा ने समय की जरूरत के मुताबिक सामाजिक बीमा की भूमिका प्रदान की है। पिछले तीन साल के दौरान दिहाड़ी रोजगार के लिए संसाधनों का प्रभावी तौर पर इस्तेमाल किया गया ताकि गरीब परिवारों के लिए आजीविका सुरक्षा में सुधार हो सके।
    • इस दौरान 10 लाख से अधिक तालाब और 6.7 लाख कम्पोस्ट पिट तैयार किए गए। इसके अलावा विभिन्न राज्यों में 1.6 लाख लिक्विड रिसोर्स मैनेजमेंट सोक पिट और सॉलिड रिसोर्स मैनेजमेंट तैयार किए गए। मनरेगा संसाधनों का इस्तेमाल गरीब परिवारों को 90 से 95 दिनों के लिए काम उपलब्ध कराने और स्वच्छ भारत मिशन अथवा मनरेगा के तहत गरीब परिवारों को शौचालय सहित नया मकान उपलब्ध कराने में किया गया। पिछले तीन साल के दौरान 71.50 लाख मकान पहले ही तैयार किए जा चुके हैं जिसमें 17.83 लाख पीएमएवाई(जी) मकान भी शामिल हैं। 33 लाख अतिरिक्त पीएमवाई(जी) मकान 31 मार्च, 2018 तक पूरे होने के उम्मीद है क्योंकि वे पहले से ही उन्नत चरण में पहुंच चुके हैं। मनरेगा का इस्तेमाल आजीविका संसाधन के तौर पर किया जा रहा है और यह तालाब, सिंचाई के कुएं, बकरी पालन, दुग्ध उत्पादन मुर्गी पालन आदि जैसी व्यक्तिगत लाभकारी योजनाओं में शामिल हैं।
  • वरिष्ठ नागरिकों को छूट
    • वरिष्ठ नागरिकों को गरिमापूर्ण जीवन प्रदान करने के लिए केन्द्रीय वित्य एवं कॉरपोरेट मामलों के मंत्री श्री अरुण जेटली ने वरिष्ठ नागरिकों के लिए महत्वपूर्ण रियायतों की घोषणा की है।
    • संसद में आज आम बजट 2018-19 पेश करते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि बैंकों तथा डाकघरों में जमा राशि पर ब्याज आय में छूट 10 हजार रुपए से बढ़ाकर 50 हजार रुपए की गई है तथा आयकर धारा 194ए के तहत स्रोत पर आयकर की कटौती नहीं की जाएगी।
    • यह लाभ सावधि जमा योजनाओं तथा आवर्ती जमा योजनाओं में प्राप्त होने वाले ब्याज के लिए भी उपलब्ध होगा।
  • बुनियादी क्षेत्र के आबंटन में 5.97 लाख करोड़ रुपए
    • सरकार ने अर्थव्‍यवस्‍था में वृद्धि के प्रमुख संवाहक की भू‍मिका की पहचान करते हुए, आम बजट 2018-19 में बुनियादी ढांचे के आबंटन में महत्‍वपूर्ण वृद्धि की है। इस क्षेत्र के लिए बजटीय और अतिरिक्‍त बजटीय व्‍ययों को 2017-18 के 4.94 लाख करोड़ रुपए से बढ़ाकर 2018-19 में 5.97 करोड़ रुपए कर दिया है।
    • 2018-19 में परिवहन क्षेत्र के लिए 1,34,572 करोड़ रुपए का अब तक का सबसे अधिक आबंटन किया गया जबकि आपदा से निपटने के लिए बुनियादी ढांचे को बढ़ावा देते हुए 60 करोड़ रुपए का आबंटन किया गया। इस आशय की घोषणा केंद्रीय वित्‍त मंत्री ने आज संसद में आम बजट 2018-19 को पेश करते हुए की।
    • शहरी बुनियादी ढांचा क्षेत्र में सरकार ने समग्र बुनियादी ढांचे और कौशल विकास के माध्‍यम से 10 प्रमुख पर्यटन स्‍थलों के विकास का प्रस्‍ताव दिया है। इसके अलावा भारतीय पुरातत्‍व सर्वेक्षण के 100 आदर्श स्‍मारकों का भी उन्‍नयन किया जाएगा। वित्‍त मंत्री अरुण जेटली ने सरकार के स्‍मार्ट सिटी मिशन और अमृत के अन्‍तर्गत किए गए कार्यों की सराहना करते हुए जानकारी दी कि स्‍मार्ट सिटी मिशन के तहत 2.04 लाख करोड़ रुपए के प‍रिव्‍यय के साथ 99 शहरों का चयन किया गया है। 2350 करोड़ रुपए मूल्‍य की परियोजनाएं पूर्ण की जा चुकी है और 20,852 करोड़ रुपए की परियोजनाएं प्रगति पर हैं।
    • अमृत कार्यक्रम के अंतर्गत 500 शहरों के लिए 77,640 करोड़ रुपए की राज्‍य स्‍तरीय योनजाओं को स्‍वीकृति दे दी गई है। 19,428 करोड़ रुपए मूल्‍य की 494 परियोजनाओं के लिए जल आपूर्ति अनुबंध और 12,429 करोड़ रुपए की लागत की 272 परियोजनाओं के लिए सीवर कार्यों के लिए अनुबंध प्रदान कर दिए गए हैं। 482 शहरों ने क्रेडिट रेटिंग प्रारंभ कर दी है और 144 शहरों को निवेश ग्रेड रेटिंग प्राप्‍त हो चुकी है।
    • सड़क क्षेत्र में हाल ही में स्‍वीकृत भारतमाला परियोजना का उद्देश्‍य प्रथम चरण में 5,35,000 करोड़ रुपए की लागत से करीब 35 हजार किलोमीटर राजमार्ग को विकसित करना है। भारतीय राष्‍ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण विशेष उद्देश्‍य वाहनों और टोल, संचालन एवं स्‍थानांतरण (टीओटी) एवं बु‍नियादी निवेश कोष जैसे अभिनव ढांचों के उपयोग को अपनी सड़क परिसंपत्तियों में शामिल करने पर विचार करेगा।
    • नागर विमानन क्षेत्र में, बजट 2018-19 में हवाई अड्डा क्षमता में पांच गुना विस्‍तार के लिए एक वर्ष में एक बिलियन आवाजाही को नियंत्रित करने हेतु एक नवीन पहल नाभ निर्माण की घोषणा की गई है। इस विस्‍तार को भारतीय हवाई अड्डा प्राधिकरण की दृढ़ बैलेंसशीट के द्वारा वित्‍त पोषित किया जाएगा। घरेलू हवाई यात्री परिवहन में प्रतिवर्ष 18 प्रतिशत की दर से वृद्धि हुई है और क्षेत्रीय संपर्क योजना ‘उड़ान’ के माध्‍यम से देशभर में 56 हवाई अड्डों और 31 हैलीपैडों को जोड़ा जाएगा जहां अभी सेवाएं नहीं है। 16 हवाई अड्डों पर संचालन पहले से ही प्रारंभ किए जा चुके हैं।
    • डिजिटल बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में आम बजट 2018-19 में डिजिटल इंडिया कार्यक्रम के लिए 3073 करोड़ रुपए के दोहरे आबंटन की घोषणा की गई है। विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग रोबोटिक्‍स, कृत्रिम गुप्‍तचर, डिजिटल बुनियादी ढांचे, व्‍यापक डाटा विश्‍लेषण और संचार क्षेत्र में प्रशिक्षण और कौशल के लिए अनुसंधान हेतु उत्‍कृष्‍ट केंद्रों की स्‍थापना में सहायता के लिए साइबर भौतिक प्रणालियों पर एक अभियान का शुभारंभ करेगा।
    • दूरसंचार बुनियादी ढांचे के निर्माण और विस्‍तार के लिए बजट 2018-19 में 10 हजार करोड़ रुपए प्रदान किए गए हैं। सरकार ने 5 करोड़ ग्रामीण नागरिकों तक ब्राडबैंड सुविधा प्रदान करने के लिए 5 लाख वाई-फाई स्‍थलों के निर्माण का प्रस्‍ताव दिया है। वित्‍त मंत्री ने जानकारी दी कि भारत नेट परियोजना के प्रथम चरण में 20 करोड़ ग्रामीण भारतीयों को ब्राडबैंड सुविधा से समर्थ बना दिया गया है।
    • श्री जेटली ने यह भी घोषणा की कि नीति आयोग कृत्रिम गुप्‍तचर के क्षेत्र में सीधे प्रयासों के लिए एक राष्‍ट्रीय कार्यक्रम की पहल करेगा। उभरती हुई नई प्रौद्योगिकियों के लाभ को प्राप्‍त करने के लिए दूरसंचार विभाग आईआईटी चेन्‍नई में एक स्‍वदेशी 5जी टेस्‍ट बैड की स्‍थापना में मदद प्रदान करेगा।
  • 2018-19 के दौरान विनिवेश
    • बैंकों के नई पूंजी उपलब्ध कराने के कार्यक्रम से सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक 5 लाख करोड़ रुपये अतिरिक्त उधार दे सकेंगे
    • सरकार ने निधियां जुटाने एवं बैंकिंग क्षेत्र में सुधार लाने के उपाय शुरू किए हैं। 2018-19 का आम बजट प्रस्तुत करते हुए वित्त एवं कॉर्पोरेट मामलों के मंत्री श्री अरुण जेटली ने आज संसद में कहा कि सरकार ने 24 केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों में नीतिगत विनिवेश की प्रक्रिया शुरू की है, जिसमें एअर इण्डिया का नीतिगत निजीकरण शामिल है।
    • निधियां जुटाने के सरकार के प्रयासों का उल्लेख करते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि 14,500 करोड़ रुपये जुटाने के लिए शुरू की गई एक्सचेंज ट्रेडिड फण्ड भारत-22 सभी भागों में ओवर सब्सक्राइब थी। इसी तरह विनिवेश के लिए 2017-18 के बजट अनुमान 72,500 करोड़ रुपये के सर्वोच्च स्तर पर अधिस्थिर थे तथा उनसे अनुमानित प्राप्तियां भी 2017-18 में लक्ष्य से कहीं अधिक 1 लाख करोड़ रुपये तक होने की उम्मीद है।
    • वित्त मंत्री ने 2018-19 के लिए विनिवेश का लक्ष्य भी 80,000 करोड़ रुपये रखा है।
  • रक्षा क्षेत्र को बजटीय सहयोग सरकार की प्राथमिकता
    • दो रक्षा औद्योगिक गलियारे विकसित किए जाएंगे सरकार औद्योगिक अनुकूल रक्षा उत्पादन नीति 2018 लाएगी
      रक्षा क्षेत्र के लिए पर्याप्त बजट सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिकता रहेगी। केंद्रीय वित्त और कॉर्पोरेट मामलों के मंत्री श्री अरुण जेटली ने आज संसद में आम बजट 2018-19 पेश करते हुए कहा कि पिछले साढ़े तीन वर्षों में रक्षा बलों के आधुनिकीकरण और कार्य क्षमताओं में वृद्धि पर सरकार का जोर रहा है।
    • वित्त मंत्री ने देश की सीमाओं पर मिलने वाली चुनौतियों से निपटने और जम्मू कश्मीर तथा पूर्वोत्तर भारत में आंतरिक सुरक्षा को बनाए रखने में सैन्य बलों की भूमिका कि प्रशंसा की।
    • वित्त मंत्री ने बताया कि देश में रक्षा उत्पादन क्षमताओं को बढ़ाने के लिए कई पहल की गई हैं, ताकि रक्षा जरूरतों के मामले में देश आत्मनिर्भर बन सके।
    • श्री अरुण जेटली ने कहा कि रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को उदार बनाने के साथ-साथ निजी निवेश के लिए द्वार खोल दिए गए है। सरकार देश में दो रक्षा औद्योगिक उत्पादन गलियारों के विकास के लिए कदम उठाएगी। उन्होंने कहा कि सरकार औद्योगिक उद्योगों के अनुकूल रक्षा उत्पादन नीति 2018 लेकर आएगी ताकि सार्वजनिक क्षेत्र, निजी क्षेत्र और मध्यम लघु सूक्ष्म उद्योगों द्वारा घरेलू उत्पादन को प्रोत्साहित किया जा सके।
  • मध्‍यम लघु तथा सूक्ष्‍म उद्यम एवं रोजगार
    • मध्‍यम लघु तथा सूक्ष्‍म उद्यम एवं रोजगार को बढ़ावा देने के लिए बजट में 3794 करोड़ रुपए प्रदान किए गए हैं। अप्रैल 2015 में मुद्रा योजना का शुभारंभ किया गया। जिसके तहत 10.38 करोड़ रुपए के मुद्रा लोन दिए गए।
      इनमें से 76 प्रतिशत ऋण खाते महिलाओं के जबकि 50 प्रतिशत से ज्‍यादा अनुसूचित जाति, जनजाति और अन्‍य पिछड़े वर्ग के हैं। 2018-19 के लिए मुद्रा के अंतर्गत तीन लाख करोड़ रुपए के ऋण का लक्ष्‍य रखा गया है।
    • रोजगार सृजन की प्राथमिकता सरकार की नीतियों में प्रमुख रूप से शामिल हैं वित्‍त मंत्री ने एक स्‍वतंत्र अध्‍ययन का उल्‍लेख करते हुए कहा कि इस वर्ष 70 लाख औपचारिक रोजगारों का सृजन किया जाएगा।
    • 2018-19 में टैक्‍सटाइल क्षेत्र में 7148 करोड़ रुपए परिव्‍यय का प्रसताव है।
  • रेलवे एवं परिवहन
    • वर्ष 2018-19 के लिए रेलवे का पूंजीगत व्‍यय 1,48,528 करोड़ रुपए रहा है। 2017-18 के दौरान चार हजार किलोमीटर का विद्युत रेलवे नेटवर्क प्रारंभ हो चुका है।
    • मुंबई का स्‍थानीय रेल नेटवर्क 11 हजार करोड़ रुपए की लागत से दोहरी लाइनों के साथ 90 किलोमीटर होगा।
    • इसके अलावा 40 हजार करोड़ रुपए की लागत से एक अतिरिक्‍त 150 किलोमीटर का उप शहरी नेटवर्क योजानवित किया जा रहा है।
    • एक नवीन पहल नाभ निर्माण के अंतर्गत प्रतिवर्ष एक बिलियन आवाजाही को नियंत्रित करने के लिए हवाई अड्डा क्षमता में पांच गुणा विस्‍तार करने का प्रस्‍ताव बजट में दिया गया है। इसके अलावा सरकार ने पिछले वर्ष प्रारंभ की गई उड़ान नामक क्षेत्रीय योजनाओं के अंतर्गत 56 हवाई अड्डों और 31 हैलीपैडों को पुन: जोड़ा जाएगा जिनमें अभी सेवाएं प्रदान नहीं की जा रही है।
  • दीर्घावधिक पूंजी लाभ (एलटीसीजी)
    • निर्धारण वर्ष 2017-18 के लिए सूचीबद्ध शेयरों और यूनिटों से छूट प्राप्त पूंजी लाभ की राशि लगभग 3,67,000 करोड़ रुपए है।
    • श्री जेटली ने कहा कि मैं एक लाख रुपए से अधिक के ऐसे दीर्घावधिक पूंजी लाभों पर किसी सूचकांक के बिना 10 प्रतिशत की दर से कर लगाने का प्रस्ताव करता हूं।
  • आयुष्मान भारत योजना
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