दीन दयाल हस्तकला संकुल

Deendayal Hastkala Sankulदीन दयाल हस्तकला संकुल, वाराणसी: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 22 सितम्बर को बड़ा लालपुर, वाराणसी में दीन दयाल हस्तकला संकुल का उद्घाटन दिया। टीएफसी वाराणसी और आस-पास के इलाक़ों के हथकरघा उद्योग और हस्तशिल्पियों के लिए एक नई उम्मीद है। इसके जरिए बुनकरों का माल खरीदने की व्यवस्था है, ताकि उनका माल सही समय पर सही जगह पहुंच सके और उनकी आमदनी बढ़े। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बड़ा लालपुर में दीन दयाल हस्तकला संकुल यानि ट्रेड फैसिलिटी सेंटर का उद्घाटन किया। टीएफसी वाराणसी और आस-पास के इलाक़ों के हथकरघा उद्योग और हस्तशिल्पियों के लिए एक नई उम्मीद है। इसके जरिए बुनकरों का माल खरीदने की व्यवस्था है, ताकि उनका माल सही समय पर सही जगह पहुंच सके और उनकी आमदनी बढ़े।
दीनदयाल हस्तकला संकुल से वाराणसी और आस-पास के इलाक़ों में रहने वाले शिल्पियों और बुनकरों को काफी उम्मीदें हैं। प्रधानमंत्री ने वादा किया था कि बनारस की बुनकरी और हस्तशिल्प से जुड़े उत्पादों को वैश्विक स्तर पर बुलंदियों पर पहुंचाऐंगे,पहचान दिलायेंगे और ये काम उन्होनें 3 साल के भीतर कर भी दिखाया। वक्त के साथ सरकारों की उदासीनता के कारण ये कलाएं बुरे दौर से गुजर रही हैं लेकिन पीएम मोदी ने एक संकल्प लिया और ये अब सिद्ध हो चुका है। दीनदयाल हस्तकला संकुल में प्रधानमंत्री ने शिल्पियों के मुलाक़ात की और कला के बारे में जानकारी भी ली। संग्रहालय के अवलोकन के दौरान उन्होने डिज़िटल कारपेट और बनारस की संस्कृति और कलाओं से तस्वीरों के ज़रिए रू-ब-रू भी हुए। प्रधानमंत्री ने संकुल में शिल्पी व बुनकरों को पहचान पत्र भी दिए।
इस दौरान केंद्रीय कपड़ा मंत्री स्मृति ईरानी राज्य मंत्री अजय टम्टा और उ.प्र. के राज्यपाल रामनाईक,मुख्यमंत्री योगी भी प्रधानमंत्री के साथ संग्रहालय की ख़ूबियों को जाना। दरअसल वाराणसी के इलाक़े में हस्तकला और हस्तकरघा दोनों के ज़रिए लाखों लोगों को रोज़गार मिलता है। ज़रूरत थी इन कलाओं के संरक्षण और संवर्धन के साथ आधुनिक बनाने की। ऐसे में ये दीनदयाल हस्तकला संकुल कलाकारों के लिए एक नया अध्याय लेकर आया है। काशी क्षेत्र में परंपरा से ही शिल्प का ज्ञान है यही वज़ह है कि यहां के आठ उत्पादों को जीआइ यानि जियोग्राफिकल इंडीकेशन को बौद्धिक सम्पदा अधिकार का दर्ज़ा हासिल है। ये सेंटर लोगों के साथ विश्व में भी काशी क्षेत्र के हैण्डलूम और हस्तशिल्प के बारे में तो जानकारी देगा ही साथ ही बनारस के खान-पान और इसकी संस्कृति भी संजोए रखेगा।

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