आर्थिक समीक्षा 2015-16, आर्थिक सर्वेक्षण के मुख्य बिंदु

economic survey 2015-16आर्थिक सर्वेक्षण या आर्थिक समीक्षा 2015-16 जो वित्त मंत्रालय, भारत सरकार का फ्लैगशिप वार्षिक दस्ताकवेज है, विगत 12 महीनें में भारतीय अर्थव्यवस्था में घटनाक्रमों की समीक्षा करता है, प्रमुख विकास कार्यक्रमों के निष्पादन का सार प्रस्तुत करता है और सरकार की नीतिगत पहलों तथा अल्पावधि से मध्यावधि में अर्थव्यवस्था की संभावनाओं पर विधिवत प्रकाश डालता है। इस दस्तावेज को बजट सत्र के दौरान संसद के दोनों सदनों में पेश किया जाता है।
आर्थिक समीक्षा 2015-16, आर्थिक सर्वेक्षण के मुख्य बिंदु:

  • वित्तमंत्री अरुण जेटली ने 26 फ़रवरी 2016 को वर्ष 2015-16 की आर्थिक समीक्षा लोकसभा में पेश किया। इस सर्वे में अनुमान जताया गया है कि 2016-17 में आर्थिक विकास दर 7 से 7.75 फीसदी रहेगा।
  • वित्तीय वर्ष 2015-16 के दौरान वित्तीय घाटे को सकल घरेलू उत्पाद यानी जीडीपी का 3.90 प्रतिशत तक सीमित रखना मुमकिन। वित्तीय घाटे को सकल घरेलू उत्पाद के 3.50 फ़ीसदी के नीचे रखना ज़रूरी।
  • वित्तीय वर्ष 2016-17 के दौरान चालू खाता घाटा सकल घरेलू उत्पाद के 1% से 1.5% के बीच संभव। पूंजी कम आने से रुपए की क़ीमतें गिरने दी जा सकती है. चीन में मुद्रा अवमूल्यन को देखते हुए भारत को चौकस रहना होगा।
  • कर की जद में और ज़्यादा लोगों को लाया जाए. फ़िलहाल 5.5% लोग ही कर चुकाते हैं, इसे बढ़ा कर 20% तक लाया जाना चाहिए। 5- कर छूटों को धीरे-धीरे ख़त्म कर देना चाहिए. आने वाले समय में कर उगाही बढ़ने की सभावना है।
  • आर्थिक समीक्षा में कहा गया है कि वित्तीय वर्ष 2016-17 में भारत की राजकोषीय स्थिति पर सातवें पे कमीशन व ओआरओपी का बोझ पड़ेगा. समीक्षा में कहा गया है कि मार्च 2017 तक पांच प्रतिशत मुद्रास्फीति के लक्ष्य को आरबीआइ हासिल कर लेगा। आर्थिक सर्वे में यह उम्मीद जतायी गयी है कि भारत अगले कुछ सालों में आठ प्रतिशत से अधिक की विकास दर को हासिल कर लेगा। वित्तीय वर्ष 2016-17 में सीपीआइ इन्फ्लेशन के चार से पांच प्रतिशत के बीच होने की बात कही गयी है.यह भी संकेत है कि देश में रोजगार के अवसर बढेंगे। जारी वित्तीय वर्ष में जीडीपी ग्रोथ 7.6 रहने का अनुमान है।
  • कच्चे तेल की कम कीमतों के कारण महंगाई में तेज़ इजाफ़े के आसार नहीं, वित्तीय वर्ष 2016-17 के दौरान उपभोक्ता मूल्य सूचकांक 4.5% से 5% के आस-पास रहने की संभावना।
  • आर्थिक समीक्षा 2015-16 में प्रस्‍तावित वस्‍तु और सेवा कर (जीएसटी) को आधुनिक वैश्विक कर इतिहास में सुधार का असाधारण उपाय बताया गया है. राजनीतिक सहमति के बाद संवैधानिक संशोधन के लिए लंबित जीएसटी केंद्र, 28 राज्‍यों और 7 केंद्रशासित प्रदेशों द्वारा कार्यान्वित किया जाएगा
  • सेवा क्षेत्र: वर्ष 2015-16 में सकल मूल्‍यवर्धन की वृद्धि में सेवा क्षेत्र का योगदान लगभग 66.1 प्रतिशत रहा, जिसकी बदौलत यह महत्‍वपूर्ण शुद्ध विदेशी मुद्रा अर्जित करने वाले और एफडीआई (प्रत्‍यक्ष विदेशी निवेश) के प्रवाह की दृष्टि से सर्वाधिक आकर्षक क्षेत्र के रूप में उभर कर सामने आया है।
  • व्यापार घाटा: अप्रैल-जनवरी, 2015-16 में व्यापार घाटा घटकर 106.8 बिलियन अमरीकी डॉलर हो गया, जो 2014-15 की इसी अवधि के दौरान 119.6 बिलियन अमरीकी डॉलर रहा था।
  • एफडीआई: वर्ष 2014 के दौरान भारत में एफडीआई 34 अरब अमेरिकी डॉलर दर्ज किया गया, जो वर्ष 2013 के मुकाबले 22 प्रतिशत ज्‍यादा है। वर्ष 2014-15 और वर्ष 2015-16 (अप्रैल-अक्‍टूबर) के दौरान आमतौर पर और मुख्‍यत: सेवा क्षेत्र में एफडीआई के प्रवाह में उल्‍लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।
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