महाश्वेता देवी का निधन

mahasweta devi diesमहान लेखिका और समाजसेविका महाश्वेता देवी का 28 जुलाई को कोलकाता में निधन हो गया। वह पिछले एक महीने से बीमार चल रही थीं। गुरुवार को दिल का दौरा पड़ने के बाद अपराह्न 3 बजकर 16 मिनट पर उनका निधन हो गया।पद्मविभूषण, साहित्य अकादमी अवार्ड, रेमन मैग्सेसे और ज्ञानपीठ पुरस्कारों से सम्मानित 90 वर्षिय महाश्वेता देवी ने आदिवासियों और ग्रामीण क्षेत्र के वंचितों को एकजुट करने में मदद की ताकि वे अपने इलाकों में विकास गतिविधियां चला सकें। उन्होंने आदिवासियों के कल्याण के लिए बहुत सी सोसायटियां बनाईं। ‘हज़ार चौरासी की मां’ बेहद चर्चित कृति रही है। इस कृति पर फिल्म भी बन चुकी है।
महाश्वेता देवी का जन्म 14 जनवरी, 1926 को ढाका शहर में हुआ था। उनके पिता मनीष घटक एक कवि और एक उपन्यासकार थे और उनकी माताजी भी एक लेखिका और एक सामाजिक कार्यकर्ता थीं। उनकी स्कूली शिक्षा ढाका में हुई थी। विभाजन के समय उनका परिवार पश्चिम बंगाल में आकर बस गया। उनकी पहली उपन्यास “नाती” सन 1957 में प्रकाशित किया गया था। ‘झाँसी की रानी’ महाश्वेता देवी की प्रथम रचना है। पिछले चालीस वर्षों में उनकी छोटी-छोटी कहानियों के बीस संग्रह प्रकाशित किए जा चुके हैं और करीब सौ उपन्यासों का भी प्रकाशन हो चुका है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने उनके निधन पर दुःख प्रकट करते हुए कहा कि महाश्वेता देवी ने शानदार तरीके से लेखनी की शक्ति दिखाई। करुणा, समता और न्याय की आवाज़ मूक होना दुःखदायी है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने उनके निधन पर शोक जताते हुए कहा कि देश ने एक महान लेखक खो दिया।

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