सिओल में NSG का 5 दिवसीय अधिवेशन शुरू

NSG-nuclear-suppliers-group-meeting-2016परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह यानी एनएसजी का 5 दिवसीय अधिवेशन सोमवार से दक्षिण कोरिया की राजधानी सिओल में शुरू हो गया। इस बैठक पर भारत की सदस्यता को लेकर पूरी दुनिया की निगाहें लगी हैं। समूह में भारत के प्रवेश को महत्व देते हुए अमेरिका ने एनएसजी के सभी सदस्य देशों से भारत की दावेदारी का समर्थन करने को कहा है। भारत की एनएसजी की सदस्या हासिल करने की दावेदारी ने प्रधानमंत्री की हाल की पांच देशों की यात्रा से गति पकड़ी जब वे स्विटज़रलैंड और मैक्सिको का समर्थन हासिल करने में सफल रहे थे। विदेश सचिव एस जयशंकर ने भी एनएसजी के सभी पक्षों को राज़ी करने के लिए अधिवेशन से पहले बीजिंग और सिओल का दौरा किया।
एनएसजी 48 देशों का समूह है जो सभी प्रकार की परमाणु सामग्री, उपकरण और तकनीकि की आपूर्ति को प्रभावशाली ढंग से नियंत्रित करता है। भारत ने परमाणु अप्रसार संधि पर हस्ताक्षर नहीं किए जो एनएसजी में प्रवेश के आड़े आ रहा है। लेकिन 2008 में अमेरिका के साथ नागरिक परमाणु सहयोग समाझौता कर भारत ने अहम रियायत हासिल कर ली है। एनएसजी की सदस्यता से भारत को काफी लाभ मिलेगा। इसकी सदस्यता हासिल करने के बाद भारत, अमेरिका के अलावा दूसरे देशों से विकसित परमाणु तकनीक हासिल कर सकेगा। नामीबिया जैसे अन्य देशों से यूरेनियम हासिल करने में मदद मिल सकती है, नामीबिया में दुनिया का चौथा सबसे बड़ा यूरेनियम का भंडार है। एनएसजी की सदस्य बनने के बाद भारत दूसरे देशों को भी परमाणु तकनीक और उपकरण बेच सकेगा। इससे मेक इन इंडिया, रोज़गार को बढ़ावा देने के अलावा आईटी उद्योग को भी फायदा होगा।

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