Sardar Patel Quotes in Hindi

Sardar-Vallabhbhai-Patel-Quotes-in-Hindiसरदार वल्लभभाई पटेल के विचार, प्रमुख बातें, नारे (Sardar Vallabhbhai Patel (31 अक्टूबर 1875- 15 दिसंबर 1950) Quotes in Hindi):

  • जब कठिन समय आता है, तो कायर और बहादुर का फर्क पता चल जाता हैं क्योंकि उस समय कायर बहाना ढूंढते हैं और बहादुर रास्ता खोजते हैं।
  • मेरा सपना है कि भारत एक अच्छा उत्पादक देश बने ताकि इस देश में अन्न (भोजन) के लिए कोई भी आंसू न बहाए।
  • इस देश की मिट्टी में कुछ अलग ही बात है, जो इतनी कठिनाइयों के बावजूद हमेशा महान आत्माओं की भूमि रही हैं।
  • यह भारत के प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य हैं कि वह अनुभव करे कि उसका देश स्वतन्त्र हैं और देश की स्वतंत्रता की रक्षा करना उसका कर्त्तव्य हैं। अब हर भारतीय को भूल जाना चाहिए कि वह सिख हैं, जाट है या राजपूत। उसे केवल इतना याद रखना चाहिए कि अब वह केवल भारतीय हैं जिसके पास सभी अधिकार हैं, लेकिन उसके कुछ कर्तव्य भी हैं।
  • आज हमें ऊंच-नीच, अमीर-गरीब, जाति-पंथ के भेदभावों को समाप्त कर देना चाहिए।
  • अगर आप आम के फल को समय से पहले ही तोड़ कर खा लेंगे, तो वह खट्टा ही लगेगा। लेकिन यही आप उसे थोड़ा समय देते हैं, तो वह खुद ब खुद पककर नीचे गिर जाएगा और आपको अमृत के समान लगेगा।
  • अधिकार मनुष्य को तब तक अँधा बनाये रखेंगे, जब तक मनुष्य उस अधिकार को प्राप्त करने हेतु मूल्य न चुका दे।
  • आपको अपना अपमान सहने की कला आनी चाहिए।
  • एकता के बिना जनशक्ति शक्ति नहीं रहती जब तक कि उसमें सही तरीके से सामंजस्य स्थापित न किया जाए।
  • जो भी व्यक्ति जीवन को बहुत अधिक गंभीरता से लेता हैं, उसे एक तुच्छ जीवन जीने के लिए तैयार रहना चाहिए। सुख-दुःख को समान रूप से स्वीकार करने वाला व्यक्ति ही सही मायनों में जीवन का आनंद ले पाता है।
  • मनुष्य को ठंडा रहना चाहिए, क्रोध नहीं करना चाहिए। लोहा भले ही गर्म हो जाए, हथौड़े को तो ठंडा ही रहना चाहिए अन्यथा वह स्वयं अपना हत्था जला डालेगा। कोई भी राज्य प्रजा पर कितना ही गर्म क्यों न हो जाये, अंत में तो उसे ठंडा होना ही पड़ेगा।
  • जब जनता एक हो जाती है तो वह एक महान शक्ति बन जाती हैं, जिसके सामने बड़े से बड़ा शासक भी टिक नहीं पाता।
  • यह बिल्कुल सत्य है कि पानी में तैरने वाले ही डूबते हैं, किनारे पर खड़े रहने वाले नहीं, लेकिन किनारे पर खड़े रहने वाले कभी तैरना भी नहीं सीख पाते।
  • जिसने भगवान को पहचान लिया, उसके लिए तो संसार में कोई अस्पृश्य नहीं है, उसके मन में ऊँच-नीच का भेद कहाँ । अस्पृश्य तो वह प्राणी है जिसके प्राण निकल गए हों अर्थात वह शव बन गया हो। अस्पृश्यता एक वहम है। जब कुत्ते को छूकर, बिल्ली को छूकर नहाना नहीं पड़ता तो अपने समान मनुष्य को छूकर हम अपवित्र कैसे हुए।
  • पड़ोसी का महल देखकर अपनी झोपडी तोड़ डालनेवाला महल तो बना नहीं सकता, अपनी झोपडी भी खो बैठता है।
  • कर्तव्यनिष्ठ पुरूष कभी निराश नहीं होता। अतः जब तक जीवित रहें और कर्तव्य करते रहें तो इसमें पूरा आनन्द मिलेगा।
  • कल किये जानेवाले कर्म का विचार करते-करते आज का कर्म भी बिगड़ जाएगा। और आज के कर्म के बिना कल का कर्म भी नहीं होगा, अतः आज का कर्म कर लिया जाये तो कल का कर्म स्वत: हो जाएगा।
  • जीतने के बाद नम्रता और निरभिमानता आनी चाहिए, और वह यदि न आए तो वह घमंड कहलाएगा।
  • सारी उन्नति की कुंजी ही स्त्री की उन्नति में है। स्त्री यह समझ ले तो स्वयं को अबला न कहे। वह तो शक्ति-रूप है। माता के बिना कौन पुरूष पृथ्वी पर पैदा हुआ है।
  • हर जाति या राष्ट्र खाली तलवार से वीर नहीं बनता। तलवार तो रक्षा-हेतु आवश्यक है, पर राष्ट्र की प्रगति को तो उसकी नैतिकता से ही मापा जा सकता है।
  • भारत की एक बड़ी विशेषता है, वह यह कि चाहे कितने ही उतर-चढ़ाव आएँ, किन्तु पुण्यशाली आत्माएँ यहाँ जन्म लेती ही रहती हैं।
  • देश में अनेक धर्म, अनेक भाषाएँ हैं, तो भी इसकी संस्कृति एक है।
  • स्वार्थ के हेतु राजद्रोह करनेवालों से नरककुंड भरा है।
  • हम कभी हिंसा न करें, किसी को कष्ट न दें और इसी उद्देश्य से हिंसा के विरूद्ध गांधीजी ने अहिंसा का हथियार आजमा कर संसार को चकित कर दिया।
  • हर इंसान सम्मान के योग्य है, जितना उसे ऊपर सम्मान चाहिए उतना ही उसे नीचे गिरने का डर नहीं होना चाहिए।
  • बोलने में मर्यादा मत छोड़ना, गालियाँ देना तो कायरों का काम है।
  • बेशक कर्म पूजा है किन्तु हास्य जीवन है। जो कोई भी अपना जीवन बहुत गंभीरता से लेता है उसे एक तुच्छ जीवन के लिए तैयार रहना चाहिए। जो कोई भी सुख और दुःख का समान रूप से स्वागत करता है वास्तव में वही सबसे अच्छी तरह से जीता है।
  • यहाँ तक कि यदि हम हज़ारों की दौलत गवां दें, और हमारा जीवन बलिदान हो जाए, हमें मुस्कुराते रहना चाहिए और ईश्वर एवं सत्य में विश्वास रखकर प्रसन्न रहना चाहिए।
  • एकता के बिना जनशक्ति, शक्ति नहीं है जब तक उसे ठीक ढंग से सामंजस्य में ना लाया जाए और एकजुट ना किया जाए, और तब यह आध्यात्मिक शक्ति बन जाती है।
  • पिछला दुखड़ा रोना कायरों का काम है । हिसाब लगा कर मुकाबले की तैयारी करना बहादुरों का काम है ।
  • बेकार मत बैठिये । बेकार बैठने वाला सत्यानाश कर डालता है । इसलिए आलस्य छोड़िये । रात-दिन काम करने वाला इन्द्रियों को आसानी से वश में कर लेता है ।
  • मुफ्त चीज मिलती है,तो उसकी कीमत कम हो जाती है। परिश्रम से पाई हुई चीज की कीमत ही ठीक तरीके से लगाई जाती है।
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